वाह रे लोग ! Wow, these people!

 निरसा में मेरी मासी का घर है। यह झारखंड का एक छोटा सा शहर है। जब लॉकडाउन लगा तो वहाँ  बहुत कुछ नहीं बदला।  लोग सामान्य रूप से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। मेरी अक्सर मासी फोन पर बात होती थी तो वह अपने आस पास का किस्सा सुनाती थी।  उसी से मुझे उसके पड़ोस में रहनेवाली शिवानी के घर के बारे में पता चला।               

                     

शिवानी  निरसा की बाशिंदा है। उसके परिवार में 5 लोग हैं - माता-पिता, शिवानी, उसकी छोटी बहन शीनू और उनके दादाजी। परिवार सुख से था, पर उसकी स्थिति तब बदली जब दादाजी बिहार गए और लॉकडाउन में वहीं अपने रिश्तेदार के घर अटक गए।  वहाँ उनको बहुत दिन रुकना पड़ा।  क्या करते ? सारी सवारी बंद थी।  लॉकडाउन ख़त्म होने का ठिकाना नज़र नहीं आ रहा था।   

1-2 महीने बीतने के बाद जब इमरजेंसी में दो पहिया चलना शुरू हुआ तो उनके रिश्तेदार ने बाइक से दादाजी को निरसा  पहुँचा दिया। रिश्तेदार सरकारी ग्रामीण विकास योजना में नौकरी करते थे और दफ्तर के काम से निरसा आए थे। शिवानी के दादाजी अपने घर निरसा आकर खुश थे।  कुछ दिन बीतने के बाद उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ गई। उनको अस्पताल ले जाया गया और इलाज चलने लगा ।

इधर बातें बनने लगीं। शिवानी हर दिन सुनती कि बिहार से निरसा आते ही दादाजी की तबीयत अचानक बिगड़ना, उनका अस्पताल जाना कुछ और ही संकेत करता  है। लोगों का कहना था कि जरूर यह इंसान  कोरोना के चपेट में आ गया है और  घर वाले इस बात से जो इनकार कर रहे हैं, वह गलत है।  घरवाले जरूर सबसे कुछ न कुछ छुपा रहे हैं।

परेशानी तब और बढ़ी जब दादाजी को कोरोना होने के संदेह को कलंक और छूत की तरह देखा जाने लगा।  शिवानी और शीनू के साथ बुरा व्यवहार होने लगा। शिवानी दसवीं कक्षा में थी और सीनू आठवीं कक्षा में। वेे दोनों अपने घर के बगल में ही पढ़ने के लिए जाती थीं । लॉकडॉउन के कुछ दिन बाद से ही वे लोग जाने लगी थीं। लेकिन जब उनके घर में कोरोना का शक होने लगा तो लोग उनसे परहेज़ करने लगे। एक दिन पढ़ने के लिए बगल के घर में अंदर जाते समय शिवानी ठिठक गई।  उसकी टीचर की माँ ने दूर से ही जोर से कहां, "तुमलोग पढ़ने के लिए मत आओ।  तुम्हारे घर में कोरोना वायरस है।  आगे से अब यहाँ नहीं आना।"

थोड़ा डरते हुए शिवानी ने कहा - “नहीं आंटी।  मेरे दादाजी की तबीयत खराब हुई है, लेकिन कोरोना नहीं है हमलोग के घर में।" आंटी ने फिर से चिल्लाते हुए कहा - "घर के बाहर सब झूठ बोल रहा है क्या? बस तुमलोग अभी जाओ और कल से पढ़ने मत आना।” उसकी टीचर ने भी कहा -“तुमलोग अभी पढ़ाई करने मत आना।  अभी बस जाओ ।"

उसी समय आस-पास के घर के दो बच्चे पढ़ने के लिए अंदर आए।  उनमें से एक बच्चे ने भी शिवानी और शीनू से कहा कि इसके दादाजी को कोरोना हो गया है।  इन लोगों  से दूर रहो।

शीनू को बहुत बुरा लगा, अपना अपमान लगा।  वह गुस्से से कहने लगी -  "मेरे घर में Corona नहीं है, तुम्हारे घर में होगा।"

फिर शिवानी ने अपनी बहन को कुछ और कहने से रोक दिया।  उसको लगा कि झगड़ा हो जाएगा।  इसलिए वहाँ से उसको लेते हुए वह सीधे घर आ गई। घर पहुँचते ही शिवानी रोने लगी।  उसको ये सब बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था।   माँ ने पूछा तो शीनू ने सारी बातें बताई। तब उसकी माँ  ने दिलासा दिया, "रो मत।  हम बात करेंगे तुम्हारी टीचर से।”

शिवानी के पापा ने सुना तो कहा कि अभी किसी को पढ़ने नहीं जाना है।  और न ही  किसी को कुछ कहने की जरूरत है जब तक सारी उलझन सुलझ न जाए। मैं मासी से शिवानी का हालचाल लेती रहती थी।  चंद दिनों बाद ही मासी ने बताया कि शिवानी के दादाजी ने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया। 

दादाजी की मृत्यु की खबर से शिवानी का पूरा मोहल्ला घबरा गया। बड़े-बूढ़े सभी के मन में कोरोना का डर समा गया था। सब पागल हो रहे थे, घबरा रहे थे।  उनसे भी अधिक बुरा प्रभाव शिवानी के घरवालों पर पड़ रहा था।  मोहल्ले के लोग कहने लगे थे कि दादाजी की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है। इसलिए उनके घरवाले भी पक्का संक्रमित हो गए होंगे। सब तरह तरह की  मनगढ़ंत बातें करने लगे थे। धीरे धीरे सारे लोग शिवानी के घर के सामने जाने से भी कतराने लगे। उनसे दूरी बनाने लगे।  बात यहाँ तक पहुंच गई कि उन लोगों को जरूरी सामान मिलना भी मुश्किल हो गया।  लोग उनसे छुआछूत कर रहे थे।  

एक दिन शिवानी की माँ ने उसको घर की जरूरत का कुछ सामान लाने को बाज़ार भेजा।  तो दुकानदार ने शिवानी को सामान देने से इनकार कर दिया।  इतना ही नहीं,  उसे जाने को कह दिया। शिवानी एकदम तमतमा गई।  लौट कर वह अपनी माँ  पर गुस्सा होने लगी और कहने लगी कि अब से मुझे बाहर मत भेजना। शिवानी के पापा को भी वहां के लोग बाहर निकलने से मना करने लगे।  पूरे परिवार को घर में ही रहने को कहा गया क्योंकि लोगों को शक था कि पूरे  घर में  संक्रमण है।                          

हद हो गई कि पुलिस को बुलाया गया।  कहा गया कि कोरोना संक्रमित इस घर के लोग अगर हम सबके बीच रहते हैं तो हमें खतरा हो सकता है।  कहा गया कि एक सदस्य की कोरोना से मृत्यु भी हो चुकी  है। ये सब अपने आपको छुपा रहे हैं। अगर घर वाले बाहर आना-जाना करते हैं तो बाकी लोग जोखिम मैं पड़ सकते हैं। कोई शिवानी के घरवालों की हालत समझने को तैयार नहीं था।  पुलिस ने सबसे पहले शिवानी के घर को बाहर से बाँस से घेर दिया। ना ही घर के लोग बाहर जा सकते थे और ना ही बाहर के लोग घर के अंदर आ सकते थे। एक तरफ तो शिवानी का घर भर दादाजी के गुजरने से दुखी था और दूसरी तरफ यह हंगामा। चौबीसों घंटे लोगों का ताना सहना पड़ता था और सबकी नज़र में अपने को दोषी देखना चुभता था। ।   

एक सही बात यह हुई कि पुलिस ने शिवानी के घर के हरेक व्यक्ति को कोरोना टेस्ट करवाने को कहा।  तब जाकर सबकी जाँच हुई और फिर जो रिपोर्ट आई तो हड़कंप मच गया क्योंकि शिवानी के घर के सभी लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई। अब अचंभित होने की बारी लोगों की थी जिन्होंने हो-हल्ला किया था। वे कहने लगे कि ऐसा कैसे हो गया! 

नए सिरे से मनगढ़ंत किस्से बनने लगे।  लोग कहने लगे कि हो सकता है कि शिवानी के घर वाले संक्रमित नहीं हुए होंगे। फिर आई शिवानी के दादाजी  की रिपोर्ट।  उनकी भी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई।  तब सबके होश उड़ गए। आखिर यह कैसे हो गया? दादाजी की रिपोर्ट में आया कि उनकी मृत्यु कोरोना के कारण नहीं हुई थी।  हार्ट अटैक के कारण उनको बचाया नहीं जा सका था।  मैंने मासी से पूरा किस्सा सुना तो यही कहा कि 

            जब रिपोर्ट साफ तो

            सबका मन साफ।

मोहल्लेवालों ने मिलकर शिवानी के घर के चारों ओर जो बाँस लगाया हुआ था जल्दी जल्दी सबको हटाया। सब पहले जैसा किया गया। लोग शिवानी के घर वालों से व्यवहार भी पहले जैसा करने लगे।  ऐसे करने लगे मानो कुछ हुआ ही नहीं था। कुछ ने कहा कि हम सबको सच्चाई नहीं पता थी।  अचानक यह सब हो गया ना, इसलिए किसी की बुद्धि ने काम नहीं किया, किसी को समझ नहीं आया।

धीरे धीरे शिवानी के घर की हालत सामान्य होने लगी।  एक दिन उसकी टीचर ने खुद से उनको फोन  किया और शिवानी और शीनू को पढ़ने आने को कहा। तब शिवानी की माँ ने उसकी टीचर से कहा,  "आप लोग बिना कुछ जाने ही बच्चे को कुछ भी कहने लगते हैं। शिवानी आपके यहाँ से आकर रोने लगी थी।  आखिर बच्चों के दिमाग पर कितना बुरा असर पड़ जाता है।"

शिवानी की टीचर ने सफाई देते हुए कहा -  " पता नहीं न था कि ऐसा कुछ होगा।"

फिर शिवानी के पापा ने दोनों बेटियों को उस टीचर से पढ़ने जाने से ही मना कर दिया। लोगों के पास अपनी गलत हरकत का कोई जवाब नहीं था। उनको कोई अफ़सोस भी नहीं था।  कुछ लोग बोले जो हमलोगों को लगा वह हम सबने कहा था।  खैर,चलो अच्छा हुआ कि किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई। शिवानी को यह सब सुन-सुन कर चिढ़ हो रही थी। 

मेरी मासी को गुस्सा आ रहा था कि लोगों ने  झूठ मूठ का इतना तमाशा खड़ा किया। उसे शिवानी के परिवार की बड़ी चिंता हो रही थी।  जब मैंने मासी से सब सुना तो मुझे यह गाना याद आया  

कुछ तो लोग कहेंगे,

लोगों का काम है कहना।

मैं खुद आश्चर्य में पड़ गई थी कि कोरोना का कहर इतना बढ़ गया है कि लोग अंधविश्वासी हो गए थे। किसी की मृत्यु हुई नहीं कि उसका कारण कोरोना समझ लेते थे और जब रिपोर्ट आती है तब उनकी आँखों से पर्दा हटता था। शिवानी और शीनू ने पूरे लॉकडाउन में लोगों के अंधविश्वास का जो नतीजा झेला वह भयानक था। मुझे उनकी सूझ बूझ पर नाज़ है। 

 

My aunt (Masi) has her house in Nirsa. It’s a small city in Jharkhand. When lockdown was announced not much changed at that place. People were normally living their life. I did speak to my aunt over the phone and she shared stories about her neighbors with me. From her I got to know about her neighbor Shivani. Shivani is a resident of Nirsa, she has five members in her family. Mother, father, Shivani, her younger sister Shinu and their grandfather.

 

Family was living in peace but their condition changed when their grandfather was in Bihar and he got stuck at their relatives house when the lockdown was declared. He had to stay their for long what else could he do? There was no conveyance and no one knew when the lockdown would get over? 1-2 months later when the two wheeler were allowed on the roads due to any emergency, the relative dropped their grandfather back to Nirsa on his bike. The relative worked in Government Gramin Vikas yogna office, and he came to Nirsa for some work.

 

Shivani’s grandfather was very happy to come back home in Nirsa but after few days he got ill and was in a serious condition, he went under a treatment.

There were rumors, Shivani started hearing that her grandfather getting sick immediately after coming back from Bihar to Nirsa and he getting admitted in a hospital indicates something else. People said that definitely this person is corona positive and the family who are denying this are wrong. The family is definitely hiding something from everyone.

The problem increased when people started treating the grandfather as an untouchable only with a thought that he might be corona positive. Shivani and Shinu were mistreated. Shivani was in class 10th and Shinu was in 8th class, both of them went to study near their house only. They started going to study after lockdown only, but when their was a doubt that their family must effected with corona people started maintaining distance from them.

One day before entering the house where Shivani studied she stopped at the door, the mother of her teacher said from the distance that you both should stop coming here to study as you have corona virus at your home, you shouldn’t come back here.

 

Shivani hesitatingly said:- “No aunty my grandfather is sick but we don’t have corona virus in the house.”

Aunty said with her loud voice from the distance- “Is everyone outside your house lying? You go now and don’t come here to study from tomorrow.”

The teacher also said- You don’t come now here to study you go for now.

At that time two of the students who resided near buy entered the class to study one of them told Shivani and Shinu that their grandfather is having corona and everyone should stay away from them.

 

Shinu got furious and felt humiliated and said- “I don’t have corona at my house you must be having at your house.” Then Shivani stopped her sister from saying anything else, she thought it will lead to a fight. She took her sister’s hand and went straight back to home. Reaching back home Shivani started crying. Their mother asked what happened and Shinu told her the entire incidence. Their mother consoled them and said “I will talk to your teacher”.

Shivani’s father said no one has to go to study neither has to say anything to anyone until things get resolved. I kept asking to my aunt about the whereabouts of Shivani, I got to know that after few days of treatment Shivani’s grandfather lost his life.

 

After the news of their grandfathers death, Shivani’s whole neighborhood was in fear, the elderly people were worried and scared. More than that Shivani’s family was having a bad effect on themselves, people started saying that Shivani’s grandfather died because of Corona, that’s why the family members might also have got infected. People started spreading rumors.

 

People started avoiding going near to their house. They maintained distance from them. It got difficult for them to even go out and buy the essentials. People treated them as untouchables. One day Shivani’s mother sent her to the market to buy some goods but the shopkeeper refused to give her the needful. He also asked Shivani to go back. She was shocked and was angry, she told her mother “Don’t send me out of the house from now on.” People also asked Shivani’s father to stay at home and not to step out. The entire family had to stay in home because people suspected they all are infected. 

 

It crossed the limits when the police was called and the people said that if this infected family lived here it will be a risk for all of them. They also said that one of the family member died due to corona and they are all hiding themselves. They said if the family members step out of the house the others might get into trouble. No one was their to understand Shivani’s family. Police immediately barricaded their house. Shivani’s family was confined in the house. On one hand they were mourning on their grandfather’s death and on the other hand they had to face the allegations of the neighbor, people looked at them as guilty.  

 

One good thing happened that  the police asked Shivani’s family to get their corona tested. Then they went for the test and the report surprised everyone as the entire family was corona negative. Now it was time for the people to be surprised as they have spread the rumors and now they started thinking how could this be possible?

New rumors started as people said that maybe the family might have not been infected. Then Shivani’s grandfather’s report came which turned out to be negative as well. People were amazed and started thinking how could this be possible even?

 

Grandfather’s report said that he did not die because of corona but due to heart attack it wasn’t possible to save him. I heard the whole story from my aunt and then I said 

“When the report was clear, everyone’s heart got clear.” 

 

People removed the barricades quickly which surrounded Shivani’s house. Things were back to normal, people started to behave normally with their family again. People acted  as if nothing had happened, they also said that no one knew the truth and all of sudden all this happened so no ones brains were working properly, and neither could anyone understood.

Slowly the condition of Shivani’s house started to turn normal. One day their teacher called them and said Shivani and Shinu can come back to study. Shivani’s mother told the teacher “Without knowing anything you spoke to these children so badly, Shivani started to cry when she came back home. This impacted the brains of the child so badly!”

Shivani’s teacher started giving an explanation and said didn’t know something like this will happen.

Shivani’s father decided he wont send his daughters back to the same teacher for their studies. People had no answer for their wrong doings.  Neither was anyone sorry, few of them said we said what we felt like, thank god no one had a positive report. Shivani was irritated listening  to the same thing.

My aunt was very angry,  as people alleged the family falsely , she was worried about Shivani’s family.  When I heard this from my aunt I told her it reminded me of a song. “Kuch toh log Khenge logo ka kaam hai kehena” (People will say something, its their work to say).

 

I myself was surprised that corona has spread so much fear that people have become superstitious. Before even dying people assume that the reason of death is corona and their blindfolds only gets removed after seeing the report.  Shivani and Shinu had to face the people’s superstitiousness. I am proud to see their maturity and understanding.